BJP से क्यों नाराज़ है उत्तर प्रदेश का NDA कुनबा

बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के घटक दलों की उठापटक और फिर सीटों के स्पष्ट बँटवारे के बाद अब नाराज़गी की आँच उत्तर प्रदेश में भी पहुंच चुकी है.

वैसे तो उत्तर प्रदेश में एनडीए के प्रमुख घटक सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर आए दिन राज्य सरकार और बीजेपी को आँखें दिखाते रहते हैं लेकिन अब एक अन्य अहम घटक दल अपना दल (एस) की ओर से भी बीजेपी को अल्टीमेटम मिलने लगा है.

अपना दल (एस) ने बीजेपी पर घटक दलों के साथ भेदभावपूर्ण बर्ताव करने और महत्व न देने का आरोप लगाया है. अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल केंद्र की मोदी सरकार में राज्य मंत्री हैं.

भाजपा ने बड़े भाई का धर्म नहीं निभाया'
बीबीसी से ख़ास बातचीत में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अनुप्रिया के पति आशीष पटेल कहते हैं कि सहयोगी दलों के प्रति बीजेपी का ये उपेक्षापूर्ण रवैया तब से शुरू हुआ है जबसे उत्तर प्रदेश में एनडीए की सरकार बनी है.

आशीष पटेल कहते हैं, "मुख्य रूप से बीजेपी की प्रदेश इकाई का रवैया बेहद असहयोगात्मक है. सुहेलदेव समाज पार्टी और अपना दल (एस) के साथ आने से ही बीजेपी को दलितों-पिछड़ों का वोट मिला लेकिन सरकार बनने के बाद अब वो सहयोगी दलों की अहमियत को नज़रअंदाज कर रही है."

आशीष पटेल कहते हैं, "हमने बीजेपी के साथ 2014 का लोकसभा चुनाव और 2017 में विधानसभा चुनाव पूरी ताक़त और मेहनत से लड़ा जिसका परिणाम भी बेहतरीन रहा. हम दोनों ही दलों ने गठबंधन में छोटे भाई की भूमिका का बख़ूबी निर्वाह किया और अभी भी कर रहे हैं लेकिन बीजेपी बड़े भाई का धर्म अब तक नहीं निभा पाई."

नाराज़गी की वजह

आशीष पटेल के मुताबिक, उनकी पार्टी ने कई बार बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस बारे में शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.

वो कहते हैं, "सरकार में रहते हुए भी लगता है हम सरकार में नहीं हैं. किसी भी सरकारी नियुक्ति या मनोनयन में हमारी सिफ़ारिश नहीं सुनी जाती. अब तक सैकड़ों की संख्या में सरकारी वकील बनाए गए हैं लेकिन हमारी सिफ़ारिश से एक भी व्यक्ति को नहीं बनाया गया."

अपना दल (एस) उत्तर प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनाव लड़ चुका है.

लोकसभा में इस पार्टी के दो सांसद जीते थे. विधानसभा में पार्टी के आठ विधायक हैं और पार्टी अध्यक्ष आशीष पटेल विधान परिषद के सदस्य हैं.

आशीष पटेल आरोप लगाते हैं कि केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद अनुप्रिया पटेल को अब महत्व नहीं दिया जा रहा है, "पहले उन्हें उत्तर प्रदेश में होने वाले सरकारी कार्यक्रमों में बुलाया जाता था लेकिन अब तो स्वास्थ्य मंत्रालय के कार्यक्रमों में भी बुलाना बंद कर दिया गया है."

अपना दल (एस) एनडीए का एक ऐसा सहयोगी है जिसकी बीजेपी से नाराज़गी की ख़बर पिछले पांच साल के दौरान सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई.

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